ग्रीन एंड ब्लू मास्टर प्लान

ग्रीन एंड ब्लू मास्टर प्लान

विज़न
"भोपाल को नवीनतम शहरी विकास के तरीकों का उपयोग करके देश में सबसे अधिक पर्यावरणीय रूप से स्थायी, आत्मनिर्भर तथा रहने योग्य शहर बनाना"

बिल्डिंग सेक्टर

प्रस्तावित ग्रीन एंड ब्लू मास्टर प्लान के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  1. नीतियों, कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं को विकसित और कार्यान्वित करना, जो कि एकीकृत शहरी नियोजन और पर्यावरण प्रबंधन को संघटित करेगा जिससे शहरी बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं की सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता में वृद्धि होगी।
  2. चरणों में 100% ग्रीन बिल्डिंग और नेबरहुड विकसित करना।
  3. सभी घरों को बुनियादी सेवाओं (जैसे पानी की आपूर्ति, सीवरेज और शहरी परिवहन) प्रदान करने और सभी के लिए जनसुविधाओं का निर्माण।
  4. भूमि पार्सल के पूर्ण उपयोग हेतू मापदंड।

क्षेत्र विशिष्ट स्मार्ट परियोजनाएं

अध्ययन हेतू पांच प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है: ऊर्जा, भवन, जल एवं मल प्रवाह-पद्धति, ग्रीन एंड ब्लू, और परिवहन। ऊर्जा की मांग को घटाने, ऊर्जा दक्षता में वृद्धि और ईंधन के क्लीनर मोड का प्रयोग करने के लिए इन क्षेत्रों में विशिष्ट परियोजनाएं प्रस्तावित किए गए हैं।

2036 तक भोपाल में 100% ग्रीन बिल्डिंग

योजना में 2036 तक मौजूदा बिल्डिंग स्टॉक्स के ग्रीन बिल्डिंग में चरण- वध परिवर्तन की परिकल्पना की गई है:
फेज 1: ऊर्जा सरंक्षण (2020-2031)
फेज 2: जल संरक्षण (2021- 2032)
फेज 3: गृह व्यवस्था और जल प्रबंधन (2022-2033)

  1. स्मार्ट सिटी कार्यालय के लिए कार्बन न्यूट्रल भवन
    इस परियोजना में भोपाल स्मार्ट सिटी के नए कार्यालय को एक मॉडल कार्बन न्यूट्रल बिल्डिंग के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। यह मॉडल बिल्डिंग डेवलपर्स और बिल्डरों को शहर में नेट जीरो तथा ग्रीन बिल्डिंग के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करेगा।
  2. ईसीबीसी दिशानिर्देशों की क्षमता जानकारी एवं जागरूकता
    एडवोकेसी और कैपेसिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों के हितधारकों की कैपेसिटी बिल्डिंग की जाएगी। ईसीबीसी / एमपी-ईसीबी दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, निवासियों / बिल्डरों / श्रमिकों आदि को उपयुक्त जानकारी एवं जागरूकता की आवश्यकता है। बिल्डर्स, डिजाइनर, आर्किटेक्ट्स और कुशल मजदूरों को विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जाएगा ताकि निर्माण प्रक्रिया में ग्रीन बिल्डिंग की अवधारणा को एकीकृत किया जा सके।
  3. शहरी ग्रीन प्रयोगशाला
    यह परियोजना शहर में परीक्षण प्रयोगशाला के विकास के लिए है ताकि विभिन्न प्रकार की ग्रीन बिल्डिंग सामग्री, सौर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन हेतू बैटरी को प्रमाणित किया जा सके। भोपाल ग्रीन लैब को 2,000 वर्गमीटर इकाई में प्रस्तावित भोपाल लिविंग लैब के अंतर्गत परीक्षण की सुविधा में रखा जाएगा।

ऊर्जा सेक्टर

  1. बिल्डिंग एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (बीईएमएस)
    सेंसर, इंटरनेट सिस्टम और सॉफ्टवेयर के माध्यम से - बिल्डिंग की ऊर्जा आवश्यकताओं को मॉनिटर और नियंत्रित करने के लिए बिल्डिंग एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली एचवीएसी, प्रकाश या सुरक्षा उपायों के उपयोग के बावजूद भवन की विभिन्न आवश्यकताओं की निगरानी और नियंत्रण कर सकती है।
  2. पंप की कार्यक्षमता में सुधार
    इस परियोजना में भोपाल नगर निगम क्षेत्र में चयनित 33 कम कार्यक्षमता वाले पंपों की कार्यक्षमता बढ़ने का प्रावधान है। जिसमे कुछ चयनित क्षेत्र है - राजाजीकाकुवं पम्पिंग स्टेशन, ईदगाह डब्ल्यूटीपी, बैरागढ़ डब्ल्यूटीपी, यच क्लब 1, बैरागढ़ रॉ वाटर (ओल्ड), बैरागढ़ नई डब्ल्यूटीपी, कमला पार्क और फतेहगढ़ (बादल महल) । पावर फैक्टर में सुधार करने के लिए कैपेसिटर बैंक की स्थापना की जानी है।
  3. सार्वजनिक पार्कों के लिए पोल टॉप सोलर लाइट
    बीएमसी के पार्कों और उद्यानों में स्ट्रीट लाइट के साथ सौर पैनल को लगाए जाने का प्रस्ताव हैं। दिन में उत्पन्न बिजली ग्रिड में भेजी जाएगी और संध्याकाल में ग्रिड से बिजली ली जाएगी। 1,720 लाइट पोल्स 300W पोल टॉप सौर पैनलों के साथ फिट किया जा सकता है।
  4. माय सोलर ऐप
    भोपाल में एमपीएमकेवीवीसीएल उपभोक्ताओं के लिए एक एप विकसित किया जाएगा, जो सौर रूफटॉप सिस्टम को बढ़ावा देगा। उपभोक्ता अपने स्मार्टफ़ोन पर ऐप इंस्टॉल कर सकते हैं, जिसमे वे उनके छत के ऊपर का क्षेत्र और जुड़े लोड / बिल्डिंग क्षेत्र, उपकरणों की संख्या, संचालन के घंटे आदि डाल कर आवेदन कर सकते हैं। आउटपुट कैलकुलेटर सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता, आवश्यक सौर पैनल की क्षमता, सौर रूफटॉप स्थापना की लागत / सब्सिडी, सौर पैनल से ऊर्जा के उपयोग एवं प्रति माह कुल बचत की जानकारी देगा।

ग्रीन एंड ब्लू कवर

  1. शहरी वन निर्माण और प्रबंधन
    इस परियोजना में शहरी वन के तहत बहुआयामी स्थान के निर्माण का प्रावधान हैं, जो की नागरिकों के लिए विविध, स्वस्थ और सुलभ रहे। इसमें पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए वृक्षों के बागान, पानी के बहाव को रोकने और शहरी इलाकों में बाढ़ को कम करने के लिए प्राकृतिक समाधान शामिल हैं। चयनित जगहों में कालीअसोट, जहांगीराबाद, लाहरपुर, लाहरपुर नाला, हताईखेड़ा, अपर लेक और पतरा नाला शामिल हैं। कुल 10.6 स्क्वायर किलोमीटर का क्षेत्र प्रस्तावित है।
    इस परियोजना में सस्टेनेबल ड्रेनेज सिस्टम (एसडीडीएस) घटक शामिल हैं। यह डाउनस्ट्रीम प्रवाह को कम करने और बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए प्रवाह दर का प्रबंधन करेगा। यह प्रदूषण को भी कम करता है और भूजल के रिचार्जिंग को बढ़ावा देता है।

परिवहन सेक्टर

  1. भोपाल में पैदल यात्री, साइकिल चालक और परिवहन के लिए बुनियादी ढांचों का विकास
    भोपाल में पैदल यात्री और साइकिल चालक के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने हेतु 153.02 किमी के ग्रीन कॉरिडोर / ग्रीन वेज़ का आर्टीरियल नेटवर्क प्रस्तावित किया गया है तथा फुटपाथ, साइकिल ट्रैक्स और पैदल यात्री क्रॉस ओवर और सस्टेनेबल ड्रेनेज सिस्टम (एसडीडीएस) घटक भी शामिल हैं। पायलट प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत कालियासट नहर कॉरिडोर, जहांगीराबाद कॉरिडोर और मोतियातालब-बढ़ाबाग कॉरिडोर को चुना गया हैं।
  2. एसटीपी से उत्पन बायोगैस द्वारा बसों का परिचालन
    भोपाल में 50 बसों का परिचालन बायोगैस का उपयोग करते हुए किया जायेगा। यह बायोगैस 7 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (55 एमएलडी) से उत्पादित की जाएगी। एनारोबिक पाचन के माध्यम से, माइथेनैजिम मीथेन (बायोगैस) का उत्पादन करने के लिए ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जीवविद्युत सामग्री को तोड़ते हैं। सस्ती दरों पर बसों को चलाने के लिए बायोगैस का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  3. इ- मोबिलिटी: भोपाल में इलेक्ट्रिक बसें
    यह परियोजना भोपाल में इलेक्ट्रिक हाइब्रिड मिडी बस सेवा संचालित करने के लिए है। इलेक्ट्रिक मिडी बसें ऊर्जा की खपत में कमी करेगी, भोपाल में यात्रा की पूर्व योजना में आसानी प्रदान करेगी, पॉइंट-टू-पॉइंट कनेक्टिविटी और छोटी दूरी को कवर करेगी एवं मौजूदा सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में भी पूरक रहेगी।

जल एवं मलप्रवाह-पद्धति

  1. डिसेंट्रलाइज़्ड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट सिस्टम (डीवैट्स)
    डिसेंट्रलाइज़्ड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट सिस्टम, स्रोत पर सीवेज के उपचार एवं इसके पुन:उपयोग को सुनिश्चित करता है। यह न केवल शहर के पूंजीगत व्यय को बचाता है बल्कि संसाधन के पुनरावृत्ति को भी बढ़ावा देता है। परियोजना के अंतर्गत 4 इलाकों को कार्यान्वयन के लिए चुना गया है - आक्रिटी इको सिटी (मिस्रोड वार्ड), चिनार फॉर्च्यून सिटी (मिस्रोड वार्ड), मीनाक्षी प्लैनेट सिटी (बागमुगलीया वार्ड), पेबबल बे (बागमुगलीया वार्ड) ।
  2. रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (आरआरडब्ल्यूएच) ऐप
    भोपाल में रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (आरआरडब्ल्यूएच) को बढ़ावा देने के लिए इंटरैक्टिव ऐप का प्रस्ताव हैं। यह ऐप "भोपाल प्लस" ऐप के अंतर्गत एक मॉड्यूल के रूप में काम करेगा और उसका मुख्य उद्देश्य इस बारे में जागरुकता पैदा करना होगा।